ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुवरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ( यजुर्वेद - ३६.३)
Aum Bhur Bhuvaha Svah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasaya Dheemahi, Dhiyo Yo Naha Prachodayat (Yajur veda - 36.3)
भावार्थ - उस प्राण स्वरुप, दुःख नाशक, सुख स्वरुप, श्रेष्ठ, तेजस्वी,
पाप नाशक , देव स्वरुप परमात्मा को हम अंतरात्मा में धारण करें | वह परमात्मा हमारी
बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें |
Meaning - May Almighty illuminate our intellect and inspire us towards the righteous path
Excerpts from गायत्री महाविज्ञान भाग १
महात्मा गाँधी कहते हैं - 'गायत्री मंत्र का निरंतर जप रोगियों को अच्छा करने और
आत्मा की उन्नति करने के लिए उपयोगी है | गायत्री का स्थिर चित्त और शांत ह्रदय से
किया हुआ जप आपत्तिकाल में संकटों को दूर करने का प्रभाव रखता है |'
स्वामी रामकृष्ण परमहंस का उपदेश है - ' मैं लोगो से कहता हूँ कि लम्बी साधना करने कि उतनी आवश्यकता नहीं है | इस छोटी-सी गायत्री साधना करके देखो | गायत्री का जप करने से बड़ी-बड़ी सिद्धियाँ मिल जाती हैं | यह मंत्र छोटा है, पर इसकी शक्ति बड़ी भारी है |'
महर्षि रमण का उपदेश है - ' योग विद्या के अंतर्गत मंत्र विद्या बड़ी प्रबल है | मंत्रों की शक्ति से अद्भुत सफलताएं मिलती हैं | गायत्री ऐसा मंत्र है, जिससे आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते हैं |'
स्वामी शिवानन्दजी कहते हैं - ' ब्राह्ममुहूर्त में गायत्री का जप करने से चित्त
शुद्ध होता है और ह्रदय में निर्मलता आती है | शरीर निरोग रहता है, स्वभाव में
नम्रता आती है, बुद्धि शुद्ध होने से दूरदर्शिता बढ़ती है और स्मरण शक्ति का विकास
होता है | कठिन प्रसंगों में गायत्री द्वारा दैवी सहायता मिलती है | उसके द्वारा
आत्मदर्शन हो सकता है |'
|
|||
| अक्षर | ग्रंथि का नाम | उसमें भरी हुई शक्ति | |
| १. तत् | तापिनी | सफलता | |
| २.स | सफला | पराक्रम | |
| ३.वि | विश्वा | पालन | |
| ४.तुर् | तुष्टि | कल्याण | |
| ५. व | वरदा | योग | |
| ६. रे | रेवती | प्रेम | |
| ७. णि | सूक्ष्मा | धन | |
| ८. यं | ज्ञाना | तेज | |
| ९. भर् | भर्गा | रक्षा | |
| १०. गो | गोमती | बुद्धि | |
| ११. दे | देविका | दमन | |
| १२. व | वाराही | निष्ठा | |
| १३. स्य | सिंहनी | धारणा | |
| १४. धि | ध्याना | प्राण | |
| १५. म | मर्यादा | संयम | |
| १६. हि | स्फुटा | तप | |
| १७. धि | मेधा | दूरदर्शिता | |
| १८. यो | योगमाया | जागृति | |
| १९. यो | योगिनी | उत्पादन | |
| २०. नः | धारिणी | सरसता | |
| २१. प्र | प्रभवा | आदर्श | |
| २२. चो | उष्मा | साहस | |
| २३. द | दृश्या | विवेक | |
| २४. यात् | निरंजना | सेवा | |