आह्वान
युवा,
जिसका चिंतन कभी वृद्ध नहीं हुआ ।
जिसे विश्वास है अपने-आप पर ।
जिसमें उमंग है, साहस है, जोश है,
कुछ कर-गुजरने का ।
जो सक्षम है, हवाओं का रूख मोड़ने में ।
युवा,
जिसे भय नहीं, कितना भी गहरा तम हो ।
जिसे संशय नहीं रत्ती भर भी अपनी जीत पर ।
जिसकी आँखों में स्वप्न है,
एक "उज्जवल भविष्य" के निर्माण का ।
युवा,
जो कभी जीता नहीं,
अपनी प्रसिद्धि या पहचान के लिए ।
जो जीता और मरता है तो बस,
अपने मूल्यों के आन के लिए ।
युवा,
जिसे गर्व है, अपनी संस्कृति पर ।
जिसे भान है, अपनी मर्यादा का ।
जिसे बोध है, अपने कर्तव्यों का ।
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आवाहन है, आमंत्रण है,
ऐसे सभी युवाओं का,
इस युग-संधि की वेला में ।
कि अब वक्त आ गया है,
अपनी-अपनी भूमिका निभाने का ।
अपने प्रतिभा-परिष्कार से,
और अपने चरित्र-चिंतन-व्यवहार से,
समस्त विश्व के सामने,
एक उदाहरण प्रस्तुत करने का ।
ताकि गूँज उठे यह प्रतिध्वनि चारों ओर,
कि- " हे असुरता,
अब समय आ गया है,
कि तुम दूर हो जाओ,
मानव-मात्र की मानसिकता से ।
वरना, कहीं इस विचार-क्रांति की ज्वाला में,
तुम्हें तिल-तिल जलकर मरना न पड़े । "
- राजेश 'आर्य' [ rajesh010439@gmail.com ]
Comments :
| Sri Prakash wrote... |
| Nice !! |
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