- राजेश 'आर्य' [ rajesh010439@gmail.com ]बहस हुईकि क्या होती है प्रेम की परिणीती,तो मैंने भी सुना दी अपनी आपबीती |कि मैं भी पड़ा था एक बारएक लड़की के प्रेमजाल में,वो लड़की जो पढ़ती थी,पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में |तो साबित करने को अपना प्रेम,मैंने लिख डालाअपने ‘खून’ से पैगामउसके नाम |और बोला उसे सौंपते हुए,कि हे प्रिये -मेरे लहू का एक-एक कतरासमर्पित है तुम्हारे लिए |तो दूसरे रोज वो मेरे पास आई,मुस्कुराई,और बोली पत्र लौटाते हुएहे भद्रे -मैंने आपका ’ग्रुप’ कर लिया है चेकपर यह करता नहींमेरे ब्लड से मैचइसलिए ये मुझे नहीं चाहिएफिर भी अगर आपको करना ही है,लहू समर्पिततो किसी ‘बी-पोजीटिव’ वाली के पास जाइए |
परिणीती
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