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*अपने भूलों को समझें और उन्हें सुधारें *आत्मीयता का विस्तार *जीवन सम्पदा का सदुपयोग सीखा जाय *अंतःकरण का परिष्कार सफल जीवन का आधार
* प्रबल पुरुषार्थ से प्रतिकूलता अनुकूलता में बदलती है *असफलता हमें हताश न कर पायें *अपने पर भरोसा करें, आप समर्थ हैं *निरीक्षण और नियंत्रण आदतों का भी करें
* भ्रमजाल से छूटें मायामुक्त हों *परिष्कृत दृष्टिकोण का ही नाम स्वर्ग है *हम सज्जनता अपनाएं, सहृदय बनें *आत्मविश्वासी पर ही दूसरे भी विश्वास करते हैं
* न किसी को न कैद करें , न कैदी बनें *गुरु से काम नहीं चलेगा- सद्गुरु की शरण में जाएँ *ईश्वर की प्राप्ति सरलतम भी, कठिनतम भी *समझदारी कृपणता में नहीं, उदारता में है
* प्रथकता छोड़ें , सामूहिकता अपनाएं *आत्मिक प्रगति का आधार-संवेदना , सहानुभूति *भगवान् को बार बार याद करो *निरंतर देता है, वह निर्बाध पाता है
* प्रतिभा संवर्द्धन की दो महानतम उपलब्धियां *चिंतन की दृष्टि से हम प्रौढ़ बनें *प्रार्थना जीवन का अविच्छिन्न अंग बनें *प्रसन्नता: एक सुलझी हुई मनःस्थिति
* चिंतन की अनगढ़ता ही दरिद्रता है *आत्मविश्वास : एक जीवन मूरि *अपने सौभाग्य को सराहते रहें *मस्तिष्क उद्वेगग्रस्त न होने दें
* इस दिव्य अनुदान को व्यर्थ न जाने दें *मात्र वर्तमान का ही विचार करें *संकटों का हल ढूढनें की उपहासास्पद विडम्बना *विचारधारा का प्रगतिशील परिष्कार
* क्या सुन्दर, क्या असुंदर *बुद्धि नहीं , भावना प्रधान *अंतःकरण की पुकार अनसुनी न करें *सद्ज्ञान वह जो सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे
* मनुष्य अनंत शक्तियों का भण्डार है *परमात्म सत्ता से सम्बद्ध होने का माध्यम *हम मनस्वी और आत्मबल संपन्न बनें *परमात्मा को जानने के लिए अपने को जानें
* अडिग निष्ठा के साथ कार्य क्षेत्र में उतरें *क्या हमारे लिए यही उचित है ? *संपदा को रोकें नहीं *शरीर को देव मंदिर बनाएं
* परमात्मा की आनंदमयी सत्ता *बुद्धिमता सर्वोपरि संपदा *जो गलेगा, वही उगेगा *मन को सुधारा-सधाया जा सकता है
* सूक्ष्म का महान सामर्थ्य *विस्मृति की मूर्च्छना *"प्रज्ञा" मानव को प्राप्त दैवी अनुदान *दृश्य से परे विचारों की विलक्षण दुनिया
* जीवन बहुमूल्य है , इसे व्यर्थ में न गवाएं *बंधन मुक्ति का राजमार्ग *परिशोधन प्रगति का प्रथम चरण *अध्यात्म क्षेत्र की सफलता का सुनिश्चित मार्ग
* परिवर्तन प्रगति की पहली सीढी *निंदा से विचलित न हों, उसे महत्व न दें *देवासुर संग्राम के इतिहास से शिक्षा ग्रहण करें *मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण
* अनेकता से एकता की और महायात्रा *ज्ञान की महत्ता कर्म के साथ ही *उठो, जागो और विकास करो *अधिक न बन पड़े तो भी थोडा तो करें हीं
* विराट का संबोधन *परिष्कृत जीवन प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष *समग्र-सफलताओं का मूल आधार *तीन असाधारण सौभाग्य
* सत को समझें, सत को पकड़ें *अक्लमंदी नहीं , बुद्धिमता अपनाएं *प्रगति तो हो, पर उत्कृष्टता की दिशा में *परिवर्तन में प्रगति और जीवन
* जीवन साधना की सिद्धि का रहस्य *आज नहीं मिल पाया तो कल मिलेगा *कर्म ही सर्वोपरि *दूरदर्शिता का दोहरा लाभ
* समृद्ध और प्रगति का आधार बाहर नहीं अन्दर *प्रार्थना अर्थात विनम्र पुरुषार्थ *जीवन लक्ष्य की प्राप्ति में तीन प्रमुख व्यवधान *स्रोत अन्दर है, बाहर नहीं
* साधना और सिद्धि का तत्वदर्शन *आनंदप्राप्ति की दिशा *आत्मिक विभूतियों का उभार, उत्कृष्ट जीवन में *भूत न बनें रहने देवत्व की और बढ़ें
* ईश्वर उपासना से जुडी श्रेष्ठ भावनायें *प्रतिकूलताओं से हडबड़ायें नहीं *नरपशु का नारायण में परिवर्तन आत्मिकी का अवलंबन *कर्मफल की सुनिश्चितता और प्रायश्चित की आवश्वकता
* उत्थान -पतन का आधार, आकांक्षाओं का परिष्कार *आत्मसत्ता परमात्म सत्ता का मिलन संयोग *समुद्रमंथन की पुनरावृति *आदर्शवादी महत्वाकांक्षाओं के फलितार्थ
* "स्व" का विकास और समष्टिगत हित साधन *करुणा में भगवान *उतरोत्तर विकास एक जीवन चक्र *चेतना के विकास में परिवेश का महत्व
* हम सब उनके पुत्र *विचार शक्ति सन्मार्गगामी हो *सार्वभौम सार्वजनीन माँ की उपासना *बुद्धि की प्रखरता ही नहीं | भावनाओंकी उदात्तता भी
* युगधर्म की अवहेलना महंगी पड़ेगी *अशुभ चिंतन छोडिये -भयमुक्त होइए *उत्तरदायित्यों को निभाएं, महान बनें *लक्ष्य की दिशा में अनवरत यात्रा
* कठिनाइयों का स्वागत कीजिये *साधना से सिद्धि और मार्ग के अवरोध *परिवर्तन असुविधाजनक होते हुए भी अपरिहार्य है *मुस्कान सुसंस्कृति व्यक्ति की निशानी
* पैरों को तोड़ें नहीं, प्रगति की सहज यात्रा पर बढ़ने दें *साधना और सिद्धि का सिद्धांत *आस्था ही आस्तिकता *देवता
* वरदानी शक्ति का देवता सुदृढ़ संकल्प *तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नहीं *जीवन, ईश्वर का स्वरूप एवं वरदान *आनंद अपनी ही मुट्ठी में पड़ा है
* उपार्जन का सदुपयोग भी *त्रिविध तनाव और उनसे छुटकारा *दिशा निर्धारण मनुष्य का अपना निर्णय *विचार शक्ति की अनंत सामर्थ्य
* परिष्कृत अंतःकरण मानव जीवन की श्रेष्ठ उपलब्धि *विचारों में क्रम-व्यवस्था एवं एकाग्रता बनाए रखें *सम्पदाएँ नहीं विभूतियाँ *परमात्मा का अस्तित्व और अनुग्रह
* दृश्य नहीं दर्शक बनें *जीवन और उसकी परिभाषा *साधना पंथ और अनंत ऐश्वर्य *वर्चस की साधना आत्मबल उभारने के लिए
* सर्वतोमुखी प्रगति के दो आधार - अध्यात्म और विज्ञान *प्राण शक्ति - एक जीवंत उर्जा *अभीष्ट की उपलब्धि भीतर से ही होगी *अंतर की गहराई में उतरें
* क्षुद्रता अपनाने से मात्र हानि ही हानि है *हम चिंतन की दृष्टि से भी प्रौढ़ बनें *हम अहंकारी नहीं, स्वाभिमानी बनें *यथार्थता और एकता में पूर्वाग्रहों की प्रधान बाधा
* सफलता आत्मविश्वासी को मिलाती है *अपनी भूलों को समझें और उन्हें सुधारें *विश्व उपवन में हमारा जीवन पुष्प सा महके *मैं को जानने में ही ज्ञान की पूर्णता है
* आवरण बंधनों का विस्फोट *प्रज्ञावतार की पुण्य वेला *आत्म देवता की साधना और सिद्धि *वैभव की जड़ें अन्तरंग की गहराई में धंसी होती हैं
* धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा *सम्पति ही नहीं सदाशयता भी *आत्म निर्भर बनें - अपने आप उठें *सौंदर्य और शक्ति का स्रोत अंतस में
* उत्थान पतन की कुंजियाँ अपने हाथ में *साधना से सिद्धि की प्राप्ति *ध्यान योग से एकाग्रता की दिव्य शक्ति का उद्भव *आत्म जागरण के लिए ध्यान योग की आवश्यकता
* आत्मीयता का विस्तार *दुःख और सुख सहोदर-सहचर *अपने को पहिचानें और विकसित करें *विचारों की प्रचंड शक्ति और प्रतिक्रिया
* उदार जीवन यात्रा * श्रम देवता की साधना *ईश्वर का द्वार सबके लिए खुला है *कर्म का प्रतिफल अकाट्य है
* आत्म त्याग ही सर्वोच्च धर्म *अनंत आनंद का स्रोत - आध्यात्मिक जीवन *आत्मिक प्रगति सद्ज्ञान पर निर्भर *परमात्मा का प्यार और आशीर्वाद केवल सत्पात्रों को
* विश्व-धर्म और भारतीय आदर्श *आज की सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता और लोकसेवा *विश्व का भावी धर्म - अध्यात्मवाद *युग निर्माण आन्दोलन और उसका स्वरुप
* मानसिक शक्ति नष्ट न होने दीजिये *परहित सरिस धरम नहिं भाई *समस्त विग्रह और क्लेशों का मूल - अहंकार *व्यवहार में औचित्य का समावेश
* आनंद रूपं अमृतं यद्विभाति *सर्वश्रेष्ठ कलाकारिता *जो गलेगा, वही उगेगा *विचारणा का उच्चस्तरीय प्रवाह
* हम तुच्छ नहीं, गौरवास्पद जीवन जियें *खाली हूजिये, आप लबालब भर जायेंगें *समष्टि की साधना का तत्वदर्शन *देवत्व है अंतिम लक्ष्य जिसका, वह है मनुष्य
* आँगन में विद्यमान कल्पवृक्ष *हम मनस्वी और आत्मबल संपन्न बनें *निष्ठा आत्मशक्ति की निर्झरिणी *सच्ची और चिरस्थायी प्रगति के दो अवलंबन
* शरीर की रुग्णता में मनोविकार प्रधान कारण *चमत्कार और सिद्धियों के भ्रम जंजाल में न भटकें, यथार्थता को समझें *अधिक न बन पड़े तो भी थोडा तो करें हीं *बुद्धिमता सर्वोपरि सम्पदा
* देवासुर संग्राम के इतिहास से शिक्षा ग्रहण करें *अपने को न केवल देखें , समझें, सुधारें वरन उबारें भी *मनोनिग्रह के लिए उपासना की आवश्यकता *हम निष्ठावान बनें स्वर्ग का सृजन करें
* निरंतर देता है, वह निर्बाध पाता है *'बलमुपास्व' - बल की उपासना करो *जीवन का अभिप्राय - दिव्य-प्रेम *मस्तिष्क को उद्वेगग्रस्त न होने दें
* दूसरों का जीवन सुन्दर बनाने में सहायता करें *आध्यात्मिक जीवन इस तरह जियें *आदर्शों की रक्षा *कर्म ही ईश्वर-उपासना
* मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं *मन को जीतना - सबसे बड़ी विजय *मन को दुर्बल न बनने दें *हम देवत्व की और बढ़ें, असुरता की ओर नहीं
* समाज की अभिनव रचना - सद्विचारों से *प्राणशक्ति एक जीवंत उर्जा *आत्मविश्वास ईश्वर का अज्रस वरदान *न तो हिम्मत हारें और न हार स्वीकार करें
* अपने को पहिचानें- आत्मबल संपादित करें *कर्मकांड से ईश्वर को न फुसलाएँ *प्रार्थना का स्वरुप, स्तर और प्रभाव *आत्मपरिष्कार से परब्रह्म की प्राप्ति
* परमात्मा को भूलो मत *मैं और मेरा नहीं, हम और हमारा *हमारी इच्छाशक्ति प्रबल और प्रखर हो *विद्या ही सफलता का मूल आधार है
* सत्य के लिए सर्वस्व का त्याग *प्रार्थना आत्मा का संबल *विचार ही चरित्र का निर्माण करते हैं *प्रार्थना ही नहीं पवित्रता भी
* पुरुषार्थी ही पुरस्कारों के अधिकारी *धर्म न तो अवैज्ञानिक है और न अनुपयोगी *अनंत संभावनावों से युक्त मानवी सत्ता *सौभाग्य भरे क्षणों को तिरस्कृत न करें
* आध्यात्मिकता- निष्क्रियता नहीं सिखाती *व्रतशील जीवन की गरिमा *दुर्बुद्धि और दुष्प्रवृतियों से छूटना ही मुक्ति है *जीवन का अर्थ
* हम अपने को प्यार करें ताकि ईश्वर का प्यार पा सकें *सत्य, प्रेम और करुणा की त्रिधारा *जिसे जीना आता है, वह सच्चा कलाकार है *मनुष्य वृक्ष वनस्पतियों से ही कुछ सीखे
* हमारे अधिक विरोधी क्यों बनते हैं ? *कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग की साधना *संकीर्णता के सीमा बंधन से छुटकारा पाएँ *परमात्म-सत्ता से सम्बद्ध होने का माध्यम
* मुक्ति के लिए प्रयत्न *कामनाओं को नियंत्रित और मर्यादित रखें *ईश्वर हमारा सच्चा जीवन सहचर है *आत्मा को देखें, खोजें और समझें
* सर्वोत्कृष्ठ परमार्थ - ज्ञानयज्ञ *श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है *उपासना अर्थात परमात्मा की समीपता *विषम वेला में हमारा महान उत्तरदायित्व
* प्रकाश का दायित्व हमें ही पूरा करना होगा *विश्व धर्म और भारतीय आदर्श *विपत्तोयों को कैसे जीता जाय ? *विचार शक्ति का जीवन पर प्रभाव
* जीवन सुन्दरता पूर्वक जियें *परमात्मा को जानने के लिए अपने आपको को जानो *ईश्वर-भक्ति और जीवन-विकास *संसार का नवीन धर्म- अध्यात्म
* नये संसार का निर्माण *अडिग निष्ठा से कार्य क्षेत्र में उतरें *सद्बुद्धि की अवधारणा *क्या हमारे लिए यही उचित है ?
* नर वानर देव मानव कैसे बनें *मन को कुसंस्कारी न रहने दिया जाय *सत्य का अवलंबन *भक्त के लिए ईश्वर का उपहार
* शरीर को देव मंदिर बनाएं *सूक्ष्म का महान सामर्थ्य *निंदा से विचलित न हों, उसे महत्व न दें *ज्ञान की महत्ता कर्म के साथ
* महान अवलंबन का परित्याग न करें *अखंड ज्योति का स्वरुप और प्रभाव *समर्थ का आश्रय लें *सच्चा मानवोचित पुरुषार्थ
* चतुर बनें या बुद्धिमान *इश्वर का दर्शन - पवित्र अंतःकरण में *समर्थता का सदुपयोग *भटकते न फिरें, ध्रुव के साथ जुड़े रहें
* दिव्य संभावना सुनिश्चित है *उन्नति नहीं, प्रगति अभीष्ट *अन्धकार को दीपक की चुनौती *बड़प्पन की सही कसौटी
* जीवन सम्पदा का सदुपयोग *आत्मा की आवाज़ *विधाता के बहुमूल्य उपहार *याचना नहीं प्रार्थना
* सम्पदा को रोकें नहीं *परमात्मा की आनंदमयी सत्ता *दृश्य से परे विचारों की विलक्षण दुनिया *जीवन बहुमूल्य है इसे न गवाएँ
* बंधन-मुक्ति का राजमार्ग *नीति उपार्जन की बाइबिल शिक्षा *शाश्वत जीवन को सुसंपन्न बनाना श्रेयस्कर है *जानना तो अपने को भी चाहिए
* उठो जागो और विकास करो *विराट को संबोधन *मन को सुधारा-सधाया जा सकता है *आनंदानुभूति के अपने-अपने रूप
* स्वच्छता और सुसंस्कारिता *आत्म विजेता ही विश्व विजेता *"प्रज्ञा" मानव को प्राप्त दैवी अनुदान *प्रतिभा - जागरूकता और तत्परता की परिणति
* कठिनाइयां आवश्यक भी हैं, लाभदायक भी *मानवी क्षमता का कोई पारावार नहीं *विचारों की असाधारण सामर्थ्यें और परिणति *परिशोधन प्रगति का प्रथम चरण
* विचारणा की पारसमणि *वैभव की कमी नहीं, पर आवश्यकता जितनी ही समेटें *मानव जीवन की विशिष्टता एवं सार्थकता *उत्कर्ष का राजमार्ग
* शांति और सौंदर्य को अपने अन्दर खोजो *जो दीपक की तरह जलने को तैयार हों *सुरदुर्लभ मनुष्य जन्म की सार्थकता *आत्मा और परमात्मा की एकता
* स्थिति के अनुरूप व्यवहार भिन्नता *समग्र श्रेष्ठता विकसित करें *मानवी प्रगति आकाँक्षाओं के स्तर पर निर्भर *विस्मृति की मूर्च्छना
* विचार - एक अद्भुत प्रचंड शक्ति स्रोत *सृजन चेतना की समर्थता और गरिमा *दूरदर्शिता - एक बहुत बड़ा सौभाग्य *तत्त्व ज्ञान और सेवा साधन
* प्रतिकूलताएँ कभी वाधक नहीं बनतीं *कर्मण्येवाधिकारस्ते *बुद्ध का लोकसेवी परिव्राजकों को सन्देश *परिष्कृत एवं सोद्देश्य चिंतन साधना का अनिवार्य मार्ग
* जीवन कलाकार हाथोँ से संजोया जाय *वैभव ही नहीं, विवेक भी *धर्म न तो अवैज्ञानिक है और न अनुपयोगी *मनुष्य भी ज्वालामुखी के तरह फूटता है
* गहरे उतरें , विभुतियाँ हस्तगत करें *अध्यात्म क्षेत्र की सफलता का सुनिश्चित मार्ग *अपने भाग्य का विधाता मनुष्य स्वयं *अनेकता से एकता की और महायात्रा
* परिवर्तन प्रगति की पहले सीढ़ी *विराट का वैभव अपने अंतर में *सफल और प्रसन्न जीवन की कुंजी सफल और प्रसन्न जीवन की कुंजी *विचार शक्ति
* स्वार्थ ही न सोचतें रहें - परमार्थ का भी ध्यान रखें *चेतना के स्तर *समय की माँग *पवित्रता, महानता और संयमशीलता
* उपार्जन का सदुपयोग भी *गुरु से काम नहीं चलेगा - सद् गुरु की शरण में जाएँ *सत्यरूपी नारायण की साधना और उपलब्द्धि *आलस त्यागें - सुसंपन्न बनें
* मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं *सक्रिय जीवन *आस्तिकता का असली स्वरुप *धर्मरहित विज्ञान सर्वनाश करके छोडेगा
* अभीष्ट को अन्तरंग में खोजें *त्रिविध तनाव और उनसे छूटकारा *दिशा निर्धारण मनुष्य का अपना निर्णय *विचारशक्ति की अनंत सामर्थ्य
* सफलता आत्विश्वासी को मिलती है *धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा *भ्रमजाल से छूटें मायामुक्त हों *वैभव खोकर भी सत्यनिष्ठ बने रहें
* जीवन के दो प्रमुख तत्त्व आशा और गति *यथार्थवादी बनें संकल्पबल विकसित करें *प्रथकता छोडें - सामूहिकता अपनाएँ *महाशून्य की यात्रा
* जीवन का कुछ उद्देश्य भी तो हो *अपने सौभाग्य को सराहते रहें *जीवन का अभिप्राय - दिव्य प्रेम *सार्वभौमिक- उपासना
* कर्म ही ईश्वर - उपासना *मन को दुर्बल न बनने दें *आत्मत्याग ही सर्वोत्तम धर्म *परमात्मा का आर्शीवाद और प्यार केवल सत्पात्रों को
* मानसिक शक्ति नष्ट न होने दीजिये *प्रतिकूलताओं की चुनौती स्वीकार कीजिये *धैर्य सीखिए *प्रतिशोध की भावना छोडिये
* संकल्प और आत्मबल एक ही तथ्य के दो पक्ष हैं *विचारों में क्रम-व्यवस्था एवं एकाग्रता बनाए रखें *जीवन और उसकी परिभाषा *यथार्थता और एकता में पूर्वाग्रहों की प्रधान बाधा
* मैं के जानने में ज्ञान की पूर्णता है *हम निष्ठावान बनें स्वर्ग का सृजन करें *निरीक्षण और नियंत्रण आदतों का भी करें *यथार्थता को समझें - आग्रह न थोपें
* विधेयात्मक चिंतन से मानसिक संतुलन ठीक रखें *परिष्कृत दृष्टिकोण का नाम ही स्वर्ग है *ईश्वर की प्राप्ति सरलतम भी, कठिनतम भी *समझदारी कृपणता में नहीं उदारता में है
* सत्य, तप और वैराग्य का समन्वय *अपने दोषों को स्वीकारें और सुधारें *प्रेम का अमरत्व और उसकी व्यापकता *आदर्शों की रक्षा
* हमारी महत्वाकांक्षाएं निकृष्ट न हों *सद्विचार अपनाए बिना कल्याण नहीं *सेवा और प्रार्थना *अनंत जीवन का स्रोत - आध्यात्मिक जीवन
* आज की सबसे बड़ी बुद्धिमता और लोकसेवा *मित्रता और उसका निर्वाह *तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नहीं *सादगी अपनायें शालीनता बरतें
* अंतर की गहराई में उतरें *अपनी भूलों को समझें और उन्हें सुधारें *विश्व उपवन में हमारा जीवन पुष्प सा महके *आत्मीयता का विस्तार
* दुःख और सुख - सहोदर सहचर *अपने को पहचाने और विकसित करें *विचारों की प्रचंड शक्ति और प्रतिक्रिया *अंतर का परिष्कार सफल जीवन का आधार
* आत्मतत्व की अखंडता *ईश्वर का अस्तित्व असिद्ध नहीं है *प्रबल पुरुषार्थ से प्रतिकूलता भी अनुकूलता बनती है *दृष्टिकोण बदले तो सब कुछ बदलेगा
* असफलता हमें हताश न कर पाए *ईश्वर की समीपता और दूरी की परख *जिंदगी जीनी हो तो इस तरह जियें *न किसी को कैद करें, न कैदी बनें
* कर्म साधना की अनिवार्यता *अंहकार के सर्प दंश से सदा बचे रहिये *आत्मविश्वास की महती शक्ति - सामर्थ्य *समाज की अभिनव रचना - सद् विचारों से
* आत्मिक प्रगति सद्ज्ञान पर निर्भर *विश्व-धर्म और भारतीय आदर्श *विश्व का भावी धर्म - अध्यात्मवाद *महाकाल की पुकार
* अंहकार से सावधान *इच्छाशक्ति के चमत्कार *जीवन, ईश्वर का स्वरुप और वरदान *साधना पथ और अनंत ऐश्वर्य
* अभीष्ट की उपलब्धि भीतर से ही होगी *जीवन संपदा का सदुपयोग सीखा जाय *अपनें पर भरोसा करें आप समर्थ हैं *ध्यानयोग- चरम आत्मोकर्ष की साधना
* सत्य का आश्रय ईश्वर का आश्रय है *हम सज्जनता अपनाएं - सहृदय बनें *अंतःकरण में ईश्वर का दर्शन *आत्मविश्वासी पर ही दुसरे भी विश्वास करते हैं
* जीवन की मूल प्रेरणा- कर्त्तव्य पालन *'उपासना' की सफलता 'साधना' पर निर्भर है *आत्मिक प्रगति का आधार- संवेदना, सहानुभूति *सच्चे सौंदर्य की खोज और साक्षात्कार
* दुःख की निवृति ज्ञान से ही संभव *दूसरों का जीवन सुंदर बनाने में सहायता करें *आध्यात्मिक जीवन इस तरह जियें *मन को जीतना - सबसे बड़ी विजय
* दृष्टिकोण के अनुरूप संसार का स्वरुप *युगनिर्माण आन्दोलन और उसका प्रयोजन *व्यक्तिवाद नहीं, समाजवाद हमारा लक्ष्य हो *अन्धकार का निराकरण आदर्शवादी व्यक्ति ही करेंगे
* सफलता के मणिमुक्तकों की प्राप्ति *ईश्वर भक्त के लिए कसौटी *और कोई रास्ता नहीं *समस्त सफलताओं का हेतु - मन
* सेवा से सत्य-प्राप्ति *भगवान को बार बार याद करो *जमाने के साथ बदलिए *धर्म एक महासागर
* परहित सरिस धरम नहिं भाई