Let's Go Green..!!
एक दिन मेरी माँ ने पूछा, बेटा क्यूँ मुझे सताते हो?
तुम सबसे प्यारे बच्चे हो, फिर भी क्यूँ समझ न पाते हो?
मैं तुम्हें सदा दुलराती हूँ, अपनी ममता के आँचल से!
सूरज की नज़र बचाने, ढकती हूँ ओज़ोन के काजल से!!
पर तुम अपनी नादानी में, बच्चों सी इस शैतानी में,
अपने ही नन्हे हाथों से, क्यूँ उसको पोंछ मिटाते हो?
बेटा क्यूँ मुझे सताते हो?
तरु रूप में तुमको भाई दिए, ये तुम्हें सदा दुलराएँगे!
तुमको डाली की गोद बिठाकर, शीतलता बरसाएँगे!!
तुमने फल खाए बागों में, खेले इनके संग फागों में,
फिर आज भूलकर सब नाते, तुम क्यूँ इनको कटवाते हो?
बेटा क्यूँ मुझे सताते हो?
वे ही तो सच्चे पालक थे, जो प्राणवायु नित देते थे!
है याद? वो दुख में गले लगाकर, जी हल्का कर देते थे!!
उस अभिभावक को तुम खोकर, बतलाते हो क्यूँ रो-रोकर?
मरकर उनने न आह भरी, तुम जीते-जी चिल्लाते हो!
बेटा क्यूँ मुझे सताते हो?
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माँ आज रुष्ट है हम सबसे, उत्पीड़न झेल रही कब से!
उसको खुशियाँ हैं लौटानी, अब फिर किरणों से, कलरव से!!
जो किया है हमने जीर्ण-शीर्ण, उसको करना होगा नवीन!
मिलकर सब करें प्रयास हरित, चिंतन बदलें ' Let's Go Green ' !!
- रोहित श्रीवास्तव 'अथर्व' [ connectingrohitit@gmail.com ]
Comments :
| Sriprakash rai, sriprakash.rai@gmail.com wrote... |
| Very Emotional !! |
| Ravi Kumar wrote... |
| I second Sriprakash ji.. |
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