कल्याणकारी और आदरणीय व्यक्तित्व

1.लाख भावुक बात और, छद्म चाल अनेक.
   कुटिलता निज पोल खोले, सात परदे को भेद..

2.अशुभ विचारों का जाल, मूर्त हुआ शैतान.
   निज मन-मन्दिर अधीन, धूमिल मर्यादा मान..

3.गुरु भक्ति विहीन हो, लाखों बात व काम.
   तब तीन भक्ति होत मूल, रति पैसा नाम..

4.तीन भक्ति से युक्त हो, शैतान बैठा घात.
   विराजमान अवचेतन,मौके पर उत्पात..

5.दूजे का दिल जीत ना सका, फ़ेंक मारक तरंग.
   कष्टदायी फ्रीक्वेंसी, श्रोता होते तंग..

5.जीवन नहीं बना पाया, सुरीलामय संगीत.
    तीन वासना अवरोध हैं, रति पैसा कीर्ति..

7.मातमी आवाज़ बना, जो भी लेते सुन.
   पीठ पीछे अनादर दें, उपस्थिति अपशकुन..

8.शैतान विजित शरीर तो, खोता आत्मसम्मान.
   और बरगलाता तभी, अवांक्षित अभिमान..

9.मानव पर हावी होत, शैतानी आधिपत्य.
   गायत्री-अमृत पान से, जागृत देवत्व..

10.देवत्व बढ़ता चले अब, श्रद्धा भक्ति के संग.
    शैतान निर्बल हो हटे, दांव-पेंच कुसंग..

11.गायत्री निर्माण कर देत,शुभ विचार व्यूह.
     शैतान गिरफ्तार होत, प्रफ्फुल्लित हो रूह..

12.अनेकों विश्राम करें तब, व्यक्तित्व की छाँव.
      हार्दिक आदर दें लोग, ना भांगें उल्टे पाँव..

13.साधना से कस देत, जीवन-वीणा तार.
     मधुर स्वर निनादित, आनंदित संसार..

        (Written by Sri Prakash [ sriprakash.rai@gmail.com ], 2004)

      

                                                  

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