वासना
वासना चेहरा बदले, बार बार झुठलाय
दर्शक बना संकल्पित, फिर न दिखा जाय..
वासना रूप बदल रही, अवचेतन अस्वच्छ.
बगुला सर्प सियार या, आंसू का मगरमच्छ.
वासना क्यों डरा रही?, ज्यों कागज का शेर.
तेरी असलियत मालूम, डर बे सिर पैर..
ज्ञान जल से भींग गया, नौटंकी का पुतला.
वासना उर्ध्वगामी अब, निज रूप अब बदला..
कागज अब गलने लगी, लुग्दी का ले रूप.
तो तू इतनी छोटी थी !, साधक गया था ऊब.
तुच्छ वासना रूपांतरित, प्रभु वासना वृद्धि.
वेश नहीं तन मन बदली, आनंद चित्त स्थिति.
षडयंत्र रचे वासना, दौड़ता था सब भूल.
अब वो क्यों दौडाए?, खुद वो चाटे धूल.
वासना अब दिखी ज्यों, मरणासन्न व्यक्ति.
आँखें तनी शरीर ठंडा, बिन वाणी अभिव्यक्ति..
वासना केवल ठगती, स्थायी कर दे भान.
इससे धोखा न खाऊँ , गुरु दो यह वरदान .(Written by Sri Prakash [ sriprakash.rai@gmail.com ], 2004)
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